मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

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January 23, 2015

बदलाव तभी संभव हैं जब आप बदलाव को समझे और स्वीकार भी करे

ना जाने क्यों लोग आज कल किसी व्यक्ति के पार्टी बदलने से उसके पुराने ब्यान पर संवाद कर रहे है। 
क्या एक बदलाव नहीं दिख रहा हैं हमे अपने देश की राज नैतिक व्यवस्था मे। 
अब प्रोफेशनल लोग हैं  जिनके लिये पार्टी महज एक नौकरी की तरह हैं जहां अगर वो परफॉर्म नहीं कर पाते हैं तो उसको बदल कर दूसरी पार्टी / नौकरी को ज्वाइन कर लेते हैं और अपनी क्षमता का पुनः आकलन करवाते है
फिर वो चाहे किरण बेदी हो या अरविन्द केजरी वाल।  दोनों को समझ आगया की दोनों की एम्बिशन दिल्ली का मुख्य मंत्री बनना हैं।  एक पार्टी मे रह कर दोनों नहीं बन सकते तो इस लिये किरण बेदी ने आप पार्टी ज्वाइन नहीं की। 
इतनी सिंपल बात हम क्यों नहीं समझ पाते क्युकी हम सब कहीं ना कहीं परिवार वाद को बहुत महत्व देते हैं।  हमारे लिये वो सबसे अच्छा होता हैं जो बंधी बंधाई लीक पर चलता हैं।  जहां कोई भी नया कुछ करता हैं जरुरी होता हैं की उस को ठोंक पीट कर व्यवस्थित हम कर दे। 
बदलाव तभी संभव हैं जब आप बदलाव को समझे और स्वीकार भी करे

1 comment:

  1. समय के साथ बदलाव जरुरी हो जाता है ...एक ही ढर्रे पर कोई बहुत समय तक नहीं चल सकता
    ..बहुत बढ़िया सामयिक प्रस्तुति

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