मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

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August 30, 2009

कुछ कहता हैं ब्लॉगर क्या कहता है

ब्लॉग
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कुछ कहता हैं ब्लॉगर क्या कहता है
वाह क्या क्या समानता हैं !!!!!!!!!!!!!!!!

दोनों लिंक मे


फिर भी प्रोफाइल पर परदा हैं !!!!!

August 29, 2009

कमीने एक लाजवाब मूवी ।

कमीने एक लाजवाब मूवी । बढिया लगी । शाहिद का "फ" लगा सैफ की भडास निकली । यहाँ तक की गिटार भी सैफ को निशाना बनाया लगा । तीन घंटे मुश्किल नहीं हुए बिताने हाल मे । विशाल भारद्वाज ने बढिया बनाई हैं । मज़ा आया ।

लिंक पढ़ ले और समझ सके तो समझे । लोग तंग आ चुके हैं

"हे विद्वान ब्लागरों हमारी संवेदना को जानो, भाषा की गलतियों को नहीं"


लिंक पढ़ ले और समझ सके तो समझे । लोग तंग आ चुके हैं ।


August 28, 2009

...........

.... बारिश की बूंदे .... उसका नीला दुपट्टा ....भीगा... लगा आस्मां और तारे ....... चमचमाते ...... झिलमिलाते....
ओढा दुप्पटा ... चाँद चमक गया .... उसके चहरे मे ...

उसकी आंखे ..... झिलमिलाती .... बिल्कुल जुगुनू ... अँधेरी रात .... उफ़ भयानक अँधेरा ... दो जुगनू ... पीले ..... नहीं .... ना ना ...... सुनहेरे .... बिल्कुल उसके कंगन जैसे ........

कंगन .... गोल ... दुनिया गोल ... अजनबी .... फैली भी ... सिमटी भी .... बिल्कुल सकुचाई ... उसकी तरह ....

वो ... एक बच्ची ....... मासूम ...... नादान सिमिटी .... नहीं सिमटी नहीं ... फैली ..... जैसे पीली सरसों का खेत ...

दूर तक ........एक पीलापन ..... थका थका ..... कहीं पीलिया .....

क्या पीलिया ..... किसने पिलाया ... साकी ने ..... नहीं नहीं जाम ने
जाम ........ कौन सा ..... नहीं जाम नहीं आम .......
आम लड़की .... उसका आम सा दुपट्टा .... छेद से भरा .... सितारे नहीं ...... चाँद नहीं ......
बस एक चिथडा ... मासूमियत से लिपटा .... भीगने से बचाता

August 26, 2009

August 24, 2009

जयजय जी गणराज विद्या सुखदाता धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता, जय देव जय देव




ये चित्र १९९५ मे खुजराहो मे खीचा था । गणेश जी विघ्न हरता हैं सबके विघ्न दूर करेगे । दुनिया से लेकर देश , देश से लेकर घर तक सब जगह खुशहाली लाये गणु बाबा यही कामना हैं
आरती गणपतीची
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुखको
दोंदिल लाल विराजो सुत गौरीहर को
हाथ लिये गुललड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे न जाये लागत हू पद को
जयजय जी गणराज विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता, जय देव जय देव
अष्टौ सिद्धी दासी संकट को बैरी
विघ्नविनाशन मंगल मुरत अधिकारी
कोटी सुरज प्रकाश ऐसी छ्बी तेरी
गंडस्तलमदमस्तक झूले शशी बिहारी, जय देव जय देव
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतत संपत सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे, जय देव जय देव

August 22, 2009

ऑन लाइन एल्बम लिंक चाहिये

ऑन लाइन एल्बम बनाना चाहती हूँ कोई अच्छा लिंक किसी को पता हो जहाँ हाई रेसोलुशन के चित्र अपलोड किये जा सके और जो साईट आसानी से खुलती हो तो बताये ।

August 20, 2009

स्वप्नलोक मे बंटता ब्लॉगर

कल फिर प्रकारों मे बटा
स्वप्नलोक मे ब्लॉगर
एक प्रकार रह गया
चमचा ब्लॉगर
जो जैसे ही
ब्लॉग जगत मे आता हैं
पुराने ब्लॉगर के ब्लॉग
की चर्चा कर जाता हैं
और फिर चर्चा
के मंच पर
ब्लॉग चर्चा करता हैं
अरे वही
जो अपने को
चमचा नहीं शिष्य
कहता हैं

August 17, 2009

किस को किस की कमी अखरती हैं पढे

किस को किस की कमी अखरती हैं पढे , आप के संपर्क मे जो हो उन तक संदेसा पहुचाए । मुझे उन्मुक्त , सागर । धुरविरोधी , गिरिराज जोशी , शिरीष , ममता , मीनक्षी , नीलिमा { २ } , सुजाता , अनुराधा की कमी बहुत अखरती हैं


10 comments:

M VERMA said...

बहुत अच्छा प्रयास है आपका. पर आपने तो उस ब्लोगर का नाम नही बताया जिसकी कमी आपको अखरती है.
मुझे एक ब्लोगर 'विनोद कुमार पारासर' की कमी खलती है. जिनका URL है
http://www.nayagharblogspotcom.blogspot.com/

yunus said...

सर्वज्ञ यानी शिरीष पंडिज्‍जी, उन्‍मुक्‍त, पंगेबाज़

Suresh Chiplunkar said...

यूनुस भाई से सहमत (तीनो नाम मेरे भी दिमाग में आये हैं), इसमें सागर नाहर का नाम भी जोड़ लें… ये भाई आते तो रहते हैं लेकिन बहुत-बहुत लम्बे अन्तराल के बाद्…

mehek said...

mamta tv wali mamta ji bahut dino se nahi dikhi,phir apni dubaiwali meenakshi ji bhi.

अविनाश वाचस्पति said...

पंगेबाज जी ने ब्‍लॉगिंग छोड़ दी है
चौखट वाले पवन चंदन
कम नजर आ रहे हैं।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

"एकोहम" ब्लाग वाले श्री विष्णु बैरागी जी!!
इनके ब्लाग के नियमित पाठक होने के नाते हमें तो इनकी कमी बहुत अखरती है।

विनीत कुमार said...

बेदखल की डायरीः मनीषा पांडे

डा. अमर कुमार said...


अभी तो अतुल अरोड़ा,मनीषा,पल्लवी,रख़्शँदा,सतीश सक्सेना,प्रज्ञा राठौड़ ही याद आ रहे हैं !
मीनाक्षी अपने बेटे के आपरेशन के बाद न जाने कहाँ व्यस्त हो गयीं ?
ममता नियमित लिखती थी, उसके पापा की बीमारी के बाद जाने क्या हुआ ?
जब भी दुकानों में सजी ज़लेबी दिखती है, ममता की पोस्ट ज़रूर याद आती है !

August 16, 2009

आप को भी किसी ऐसे ब्लॉगर / ब्लॉग की कमी अखरती हैं क्या ? चलिये उस ब्लॉग का नाम दीजिये ।

हिन्दी ब्लॉग संसार मे निरंतर नये ब्लॉग अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं अच्छा लगता हैं की इतने लोग अभिव्यक्ति के इस माध्यम को जानने लगे हैं और उसका फायदा भी उठा रहे हैं ।
दो साल से यहाँ हूँ और अब कमी महसूस हो रही कुछ ब्लॉगर की जो पहले निरंतर लिखते थे । आज महीनो हो गए हैं उनके ब्लॉग पर एक भी पोस्ट आये ।
आप को भी किसी ऐसे ब्लॉगर / ब्लॉग की कमी अखरती हैं क्या ? चलिये उस ब्लॉग का नाम दीजिये ।
एक लिस्ट बनाते हैं और फिर दूसरी पोस्ट मे वो सारे नाम दे कर कुछ कारण पता करने की कोशिश तो कर ही सकते हैं

August 15, 2009

दे दी हमे आजादी बिना खडग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

सीनियर सिटिज़न हो गया हैं अब हमारा देश , सो इसकी देख भाल की अब जरुरत हैं । देश से आशा ना रख कर देश के लिये कुछ करने का जज्बा ही आज़दी की सही परिभाषा होगा । आज मुझे कुछ ऐसा ही महसूस हो रहा हैं ।

दे दी हमे आजादी बिना खडग बिना ढाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

सभी को शुभकामनाये

August 13, 2009

तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के ,, इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के










तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के




हर चित्र के नीचे एक लिंक हैं जरुर देखे क्युकी ये ही हमारे देश का भविष्य हैं और चिंता मुक्त रहे इनके हाथो मे हमारा देश , हमारी संस्कृति सुरक्षित हैं

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

१) देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा
इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा
रक्खा है ये चिराग़ शहीदों ने बाल के, इस देश को...

२) दुनिया के दांव पेंच से रखना ना वास्ता
मंज़िल तुम्हारी दूर है लम्बा है रास्ता
भटका ना दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के, इस देश को...

३) ऐटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया
तुम हर कदम उठाना ज़रा देख भाल के, इस देश को...

४) आराम की तुम भूल भुलय्या में ना भूलो
सपनों के हिंडोलों पे मगन होके ना झूलो
अब वक़्त आ गया है मेरे हँसते हुए फूलों
उठो छलाँग मार के आकाश को छू लो
तुम गाड़ दो गगन पे तिरंगा उछाल के, इस देश को..

August 09, 2009

भारतीये नक्शे मे गलती को गूगल ने माना .

गूगल ने सम्भव है अपने व्यवसायिक हितों के लिए ही सही अपने गूगल-मैप में भारतीय भूभाग को चीन का हिस्सा दिखाना शुरू कर दिया है। कल संजय बेंगाणी ने अपनी पोस्ट
पर गूगल मैप को ग़लत बताया था और बहुत से ब्लॉगर ने इस पर अपनी आपति तुंरत दर्ज कराई थी { मैने भी !} आज हिन्दी के पेपर राष्ट्रिये सहारा मे और इंग्लिश के टाइम्स ऑफ़ इंडिया मे गूगल का गलती मानना पढ़ कर अच्छा लगा ।
आपति दर्ज करना जरुरी होता हैं । कुछ हिन्दी ब्लॉगर आपत्ति दर्ज कराने वालो को "आपत्तिजनक " मानते हैं कोई बात नहीं कुछ और समय बाद वो ख़ुद समझ जायेगे की ब्लोगिंग का सही अर्थ हैं ग़लत के खिलाफ अपनी आवाज को दूसरो तक पहुचना ।
ब्लोगिंग एक ऐसा मंच हैं जहाँ आप जो ग़लत लगे उसको लिख कर अपने साथ खडे हो सकने वाले लोगो का साथ ढूंड सकते हैं । और कोई साथ खड़ा हो ना हो "संजय " की तरह अपना विरोध दर्ज कराने मे कोई उज्र नहीं होना चाहियेजो ग़लत हैं उसका विरोध होना ही चाहिये
हर विरोध अपने अन्दर एक आग लिये होता हैं और अमूनन विरोध करने वाले बहुत भावुक होते हैं ।
ब्लोगिंग केवल साहित्य रचने का या हँसी मखोल का ही साधन नहीं नहीं हैं { वो करते रहे जिन्हे करना हैं कोई आपत्ति नहीं हैं !!!!! }

संजय की पोस्ट पर जा कर निरंतर आपत्ति दर्ज कराते रहे । सिलसिला रुकने ना दे ।
संजय बेंगाणी के द्वारा प्रविष्ट


August 07, 2009

ब्लॉग पर चुहल करने वाले पढ़ ले क्या पता कब वकील की जरुरत पड़ जाए

हँसी मजाक और ठिठोली
तब तक ही भली
जब तक दूसरे ने सह ली
ना सही तो २०० करोड़ की
हँसी ठिठोली करने वाले को पडी

ईमेल क्यूँ भेजे ,? ब्लॉग पर संवाद क्यूँ नहीं ?

मै अगर किसी से व्यक्तिगत सम्बन्ध नहीं बनाना चाहती तो उसको मेल नहीं भेजती , अगर उसकी ब्लॉग पोस्ट पर कुछ ऐसा देखती हूँ जो पसंद नहीं हैं वही कमेन्ट देती हूँ , कमेन्ट मोदेराते होने की स्थिति मे अपने ब्लॉग पर पोस्ट देती हूँ । लोग कहते हैं , लिखते हैं अपनी आपति मेल करनी चाहिये , क्यों भाई क्यों मेल करनी चाहिये । ब्लोगिंग कर रहे हैं ब्लॉग पर ही संवाद करे तो इसमे कष्ट क्यों ।
जिन से व्यक्तिगत संपर्क हैं उनको ईमेल भेज सकना सही लगता हैं पर सबको नहीं ॥

August 05, 2009

इस पोस्ट को पढ़ कर मुझे लगा की यहाँ कई ब्लोग्गर्स की निजता को भंग किया गया हैं

सब जगह यही रिश्ते रिसते

इस पोस्ट को पढ़ कर मुझे लगा की यहाँ कई ब्लोग्गर्स की निजता को भंग किया गया हैं और उनके निज के संबंधो की जानकारी को ब्लॉग पोस्ट बना कर उन संबंधो की मर्यादा को भंग किया गया हैं । आप भी पढे और देखे शायद आप मेरे विचार से सहमत हो , शायद नहीं भी हो लेकिन एक बार सोचे जरुर की अगर आप की निज की जिन्दगी को भी इसी प्रकार से पोस्ट बना कर ब्लॉग पर डाला जाए तो आप को कैसा महसूस होगा

इस ब्लॉग पोस्ट पर कमेन्ट की सुविधा नहीं हैं आप अपना कमेन्ट सब जगह यही रिश्ते रिसते पर ही दे

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